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Saturday, May 8, 2010

और मैं...

कुछ उडी से खुसबू...
कुछ सूखे फूल ....
कुछ फीके रंग...
पेड़ से टूटा एक पत्ता ...
और मैं...
कोई धुंधली सी रौशनी...
बिन मौसम बरसात की कुछ बूंदे ...
रेगिस्तान की कुछ धुल...
कोई सुनी हवेली...
और मैं...
कोई टूटा सा सपना...
कोई भटकी की राह...
कउच्च खोया सामान...
कोई अधूरी जिमेदारी ...
और मैं...
कुछ खामोश सी आवाजे ...
एक प्यारा सा स्पर्श ...
कोई मौन सा एहसास ...
कुछ बिखरे पन्ने ...
और मैं...