सपनो को आसुओ से धुलते देखा है ...
इक्छाओ को धरकनो में छिपते देखा है...
बाते तो बहुत करते है लोग ...
मैंने...
ख़ामोशी को ख़ामोशी से बाते करते देखा है ...
दिन से रात , रात से दिन अजीब नियम है कुदरत का...
मैंने...
अंधेरो को उजालो पे हसते देखा है ...
यु ही हिसाबो में निकल जाता है जीवन...
मैंने...
मौत को जिंदगी से जुआ खेलते देखा है...
अपनों की तलाश में भटकते रहते है लोग...
मैंने...
खुद के साए को अंधेरो में साथ छोरते देखा है...