
जब सब मुझे अकेला छोड़ दें...
मेरे राहों को जब तनहाई की तरफ मोड़ दें...
मेरे दिल को जब खिलौना समझ तोड़ दें...
मेरे माथे पे प्यार से चुम्बन रखने...
तब तुम आना...
जब अपने आप से मैं डरने लागु....
हर कदम में लड़खड़ा के चलने लागु...
खुद पे जब ना विश्वास रहे...
मेरे आत्मविश्वास को फिर बढ़ने ...
तब तुम आना...
जब जीवन की विसम्ताओं से मैं घबरा जाऊं...

दायित्वों को निभा के थक जाऊं ...
जब कोई ना हो जो साथ रहे...
मेरा हाथ थामने ...
तब तुम आना....
निराशा की जंजीरें जब मुझे जकड लें..

काले अँधेरे में मैं जब घिर जाऊं ...
जब कही कोई ना राह दिखे ...
मेरे जीवन में दीप जलने...
तब तुम आना...








