Friday, April 8, 2011

तब तुम आना...


जब सब मुझे अकेला छोड़ दें...
मेरे राहों को जब तनहाई की तरफ मोड़ दें...
मेरे दिल को जब खिलौना समझ तोड़ दें...
मेरे माथे पे प्यार से चुम्बन रखने...
तब तुम आना...
जब अपने आप से मैं डरने लागु....
हर कदम में लड़खड़ा के चलने लागु...
खुद पे जब ना विश्वास रहे...
मेरे आत्मविश्वास को फिर बढ़ने ...
तब तुम आना...
जब जीवन की विसम्ताओं से मैं घबरा जाऊं...
दायित्वों को निभा के थक जाऊं ...
जब कोई ना हो जो साथ रहे...
मेरा हाथ थामने ...
तब तुम आना....
निराशा की जंजीरें जब मुझे जकड लें..
काले अँधेरे में मैं जब घिर जाऊं ...
जब कही कोई ना राह दिखे ...
मेरे जीवन में दीप जलने...
तब तुम आना...

9 comments:

  1. Nice one..
    Please refer to the song "Because you loved me" by celien dion..
    this poem invites sumone to be with and that song thanks one to be with..
    amazing piece of work by you annie..

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  2. जब कही कोई ना राह दिखे ...
    मेरे जीवन में दीप जलने...
    तब तुम आना...

    बहुत सुंदर ...मन को छूती पंक्तियाँ...

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  3. Dil ko chu liya...awesome....

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  4. Saare lines mast hain yaar.. maza aa gaya padh ke.. :-) :-)

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  5. बहुत सुन्दर शब्द चुने आपने कविताओं के लिए..

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  6. Nice one .....aise he likhte raho

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  7. Well i m impressed... Will defiantly use your writing skills for my movies...

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  8. A hope is the theme of the poem as per my view...... nice:-)

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